Wednesday, August 29, 2007

Salaam Zindagi!!!

सुबह सुबह जब आँख खुली,
दुनिया थी कुछ धुंधली सी
नया नया कुछ मैं भी था
नयी थी मेरी सरगम भी

हाथ बढ़ा जब मैने देखा
फूल भी थे तो काँटे भी
जीवन की इन तंग गलियों में
धूप भी थी तो छाओ भी

बदल से आवाज़ सी आई
की मौत है तो जीवन भी
बारिश की बूँदों ने सिखलाया
इस गीत के है बोल यही
सलाम सलाम सलाम
तुझे मेरा सलाम ज़िंदगी